सूचना प्रौद्योगिकी को परिभाषित कीजिए एवं विभिन्न पक्षों का उल्लेख कीजिए
(घ) रिंग नेटवर्क - इस नेटवर्क में अनेक नोड/कंप्यूटर एक रिंग के रूप में एक दूसरे से जुड़े होते हैं । इसमें सूचना का संचार एक दिशा में होता है, अतः अत्यन्त तीव्र गति से होता है ।। 10. इंटरनेट (Internet) | इंटरनेट समाज के लिए सूचना प्रौद्योगिक का नायाब तोहफा है । यह 21 वी शताब्दी की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि है । वास्तव में इंटरनेट विश्व का सबसे बड़ा कंप्यूटर सिस्टम है, यह कई नेटवर्को का नेटवर्क है । नेटवर्क यानी सूचना के आदान-प्रदान और उपकरण सहभागिता के लिए आपस में जुड़े कंप्यूटर्स का एक समूह | इंटरनेट हजारों छोटे-छोटे नेटवर्को को आपस में जोड़ता है ताकि एक नेटवर्क पर उपलब्ध जानकारी को सभी के साथ बाँटा जा सके । | इंटरनेट की शुरुआत अमेरिकी रक्षा विभाग ने 1960 में की। 1990 आते-आते इंटरनेट की लोकप्रियता काफी बढ़ गयी । ज्ञान का यह अछूत भंडार कुछ लोगो के मनोरंजन का साधन बन गया और आज यह जीवन की आवश्यकता बन गया है । यदि इंटरनेट के किसी भाग में कुछ गड़बड़ हो जाती है तो लक्ष्य तक पहुंचने के लिए प्रणाली कोई दूसरा प्रत्यावर्ती रास्ता ठूढ़ ही लेती है । इसी कारण इंटरनेट को इंफार्मेशन हाइवे या फिर साइबरस्पेश भी कहा जाता है ।।| इंटरनेट किसी एक संस्था या संगठन के स्वामित्व या अधिकार में नहीं होता । इसके द्वारा प्राप्त होने वाली सूचना पर सरकार सेंसर के नियम लागू नहीं होते | इसका संचालन अनेक संस्थाओं और व्यक्तियों द्वारा किया जाता है । इंटरनेट का कोई मुख्यालय नहीं है सबसे बड़ी बात इंटरनेट के जरिये प्राप्त की जा सकने वाली जानकारियों की कोई निश्चित सूची नहीं होती । तथापि सारे विषय या तथ्य इंटरनेट के किसी न किसी वेबसाइट पर मिल जाते हैं । जिस विषय की जानकारी प्राप्त करनी होती है उसे सर्च इंजनों जैसे गुगली (GOOGLE) याहू (YAHOO), ऐ ओ एल (AOL) अल्टाविस्टा आदि द्वारा खोज के जरिये प्राप्त किया जा सकता है ।
ई-मेल (E-Mail)
इंटरनेट पर उपलब्ध सुविधाओं में ई-मेल सर्वाधिक महत्वपूर्ण है । इंटरनेट पर उपलब्ध इस सुविधा के माध्यम से लोग दूरस्थ अर्थात् विश्व के किसी भी स्थान से सूचनाओं का आदान-प्रदान कर सकते हैं । इंटरनेट से जुड़े किसी कंप्यूटर की मदद से विश्व के किसी कोने में स्थित किसी भी कंप्यूटर के माध्यम से लोग दोस्तों, रिश्तेदारों और परिवार के सदस्यों यहां तक कि अजनबियों के साथ संदेशों का आदान प्रदान कर सकते हैं । इलेक्ट्रोनिक सूचनाओं के रूप में यह सूचना संचार का सर्वाधिक तीव्र एवं सुगम माध्यम है ।इंटरनेट के द्वारा किसी भी विषय पर जानकारी प्राप्त करना बेहद आसान है । समाचार पत्र, पत्रिकाएँ, पर्यावरण, भोजन, हास्य, संगीत, शिक्षा, राजनीति, खेलकूद, मनोरंजन आदि विभिन्न विषयों पर हजारों साइटें उपलब्ध हैं जिन्हें अपनी आवश्यकतानुसार ब्राउज कर सकते हैं । इस पर अनेक चर्चा समूह भी बने हुए हैं जो अत्यन्त उपयोगी हैं ।
इंटरनेट से सम्बन्धित उपकरण/सेवाएँ
ई-मेल - टेलनेट (Telnet), दूरस्थ मशीनों को जोड़ने के लिए - फाइल ट्रान्सफर प्रोटोकोल (FTP), कंप्यूटर्स के मध्य फाइल आदान-प्रदान के लिए - वर्ल्ड वाइड वेब (WWW) सूचनाओं की ब्राउजिंग के लिए महत्वपूर्ण नेविगेशन टूल,हाइपर टेक्स्ट ट्रान्सफर प्रोटोकोल (HTTP) गोफर, आच, यूजनेट, बुलेटिन बोर्ड आदि सेवाएँ । डेटा संप्रेषण प्रक्रिया (Data Transmision Process)
डेटा संप्रेषण सूचना संचार प्रक्रिया का महत्वपूर्ण अंग है | कंप्यूटर से कंप्यूटर मध्य डेटा के आदान-प्रदान के लिए एक निश्चित तकनीक की आवश्यक होती है । प्रारम्भ में यह
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कार्य टेलेक्स (Telex) या टेलीग्राफ के द्वारा होता था जो डिजिटल सिग्नल सीधे संप्रेषित करते थे । लेकिन इनकी गति कम होती थी तथा इनकी पहुँच भी सीमित थी । PSTN का विकास डेटा संप्रेषण के लिए महत्वपूर्ण सिद्ध हुआ । डेटा ट्रान्समिशन के तीन अंग हैं।
- ट्रान्समीटर (Transmitter) - माध्यम (Channels)
संग्राहक (Receiver)
किसी भी कंप्यूटर संचार प्रक्रिया में उपरोक्त तीन आवश्यक तत्व हैं । इन तीनों अंगों का उपयोग कर एक बिन्दु से दूसरे बिन्दु तक डेटा संचारण होता है । वह माध्यम जिसमें डेटा संचारण कंप्यूटर और कंप्यूटर प्रणालियों का उपयोग करके होता हो, कंप्यूटर कम्युनिकेशन नेटवर्क कहलाता है । किसी लाइन पर डेटा संपेषण सामान्यतः दो माध्यमों में होता है।(1) ASYNCHRONOUS (2) SYNCHRONOUS
| प्रथम माध्यम में सूचना भेजने वाला किसी भी समय सूचना भेज सकता है। और संग्राहक उसे स्वीकार करता है । यह कई टर्मिनल में होती है । इसमें सूचना प्रति करेक्टर डेटा के रुप में संप्रेषित होती है ।
डेटा संप्रेषण के लिए एनालाग सिग्नल का डिजिटल में बदलना आवश्यक है तथा बाद में पुन: प्राप्त करने के लिए वही स्वरूप चाहिए । इसके लिए मोडेम (MODEM) का उपयोग किया जाता है । मोडेम डेटा में डिजिटल स्वरूप में बदलने के लिए माइलेटर तथा पुनः उसी स्वरूप (प्राप्तकर्ता के लिए स्वीकार्य) में परिवर्तित करने के लिए Demodulator का उपयोग होता है । यह प्रसारण हॉफ डुप्लेक्स (Half Duplex) और कुछ डुप्लेक्स (Full Duplex) हो सकता है ।
11. सारांश
इस इकाई में कम्प्यूटर प्रौद्योगिकी, भंडार प्रौद्योगिकी एवं संचार प्रौद्योगिकी की विस्तार से चर्चा की गयी है । इलेक्ट्रोनिक्स तथा दूरसंचार के क्षेत्र में 20वी शताब्दी में हुये विकास पर प्रकाश डाला गया है । कम्प्यूटर से अन्य स्थानों पर सूचनाएं प्रेषित करने के लिए नेटवर्क एक आवश्यक माध्यम है । नेटवर्किंग, नेटवर्किंग के प्रकार, नेटवर्क संरचना एवं संचार माध्यम आदि को समझाने का प्रयास इस इकाई में किया गया है । इंटरनेट एवं इंटरनेट पर उपलब्ध सुविधाओं में ई-मेल की विस्तार से चर्चा की गयी है ।। 12. अभ्यासार्थ प्रश्न1. । 2. नेटवर्क संरचना का विस्तार से वर्णन कीजिए । 3. इंटरनेट पर एक लेख लिखिए ।
13. पारिभाषिक शब्दावली
आन लाइन (On Line) : ऑन लाइन एक ऐसी प्रणाली है जिसमें केन्द्रीय संसाधक से दूर तथा अलग - अलग स्थित कंप्यूटर, टर्मिनल या उनसे संयुक्त उपकरण केबल या अन्य संचार माध्यमों- जैसे टेलीफोन लाइन या सैटेलाइट लिंक - के द्वारा मुख्य कंप्यूटर से संबंध बनाकर परस्पर अंत: क्रिया करते हैं ।
'सूचना प्रौद्योगिकीगिकी (Intarmation Technology) सूचना प्रौद्योगिकी से तात्पर्य है, कंप्यूटर एवं दूरसंचार के प्रयोग द्वारा सूचना का अधिग्रहण, भंडारण, संसाधन और प्रसार
नेटवर्क संरचना (Network Tecnology) : नेटवर्क संरचना से तात्पर्य उस तरीके से है जिससे विभिन्न टर्मिनल / कंप्यूटर एक दूसरे से जुड़े हों । 14. विस्तृत अध्ययनार्थ ग्रंथसूची 1. Ramilingam, Library Information Technology: Concepts to
Applications., Kalpaz, Delhi, 2000 2. शंकर सिहँ, कंप्यूटर और सूचना तकनीक, दिल्ली, पूर्वांचल प्रकाशन, 2000 3. शर्मा, पाण्डेय एस.के., कंप्यूटर और पुस्तकालय, दिल्ली, ग्रन्थ अकादमी, 1996

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