Industrial psychology (औद्योगिक मनोविज्ञान) Skip to main content

Industrial psychology (औद्योगिक मनोविज्ञान)

 Industrial psychology (औद्योगिक मनोविज्ञान)

तृतीय चरण में, तृतीय सारांश का प्रयोग किया जाएगा, जिसमें प्रत्येक प्रभाग को पुन: दस अनुभागों में विभक्त किया गया है । तृतीय सारांश में 320 के दस अनुभागों में से ।
324 The political process सर्वथा उचित अनुभाग प्रतीत होता है, क्योंकि चुनाव राजनीतिक प्रक्रिया का ही एक अंग है। अत: तृतीय सारांश से अनुभाग 324 निर्धारित किया जा सकता है।
वर्गीकरण के चरणों में अनुसूची का प्रयोग किया जाएगा। 4.22 अनुसूची का प्रयोग
इसी अध्याय में पहले बताया जा चुका है कि दवितीय खण्ड में वर्णित अनुसूचियां दस मुख्य वर्गों के पदानुक्रम में संपूर्ण विस्तार को दर्शाती हैं।
अनुसूची का प्रयोग विशिष्ट अनुभाग के आरंभिक स्थान से किया जा सकता है, जहां सामान्यत: उपअनुभागों का एक और सारांश मिल जाता है। उपर्युक्त उदाहरण में अनुभाग 324 के आरंभ (पृ. 223) में उप अनुभागों की एक सारणी दी गई है। इसके अंतर्गत वर्गीक 173
324.6 Elections दिया गया है।

Dewey Decimal Classification (दशमलव वर्गीकरण पद्धति) 

अब वर्गीक 324.6 के विभिन्न उपविभाजनों के अंतर्गत वर्गीक 324.63 Electroal systems मिल जाता है। अत: 'चुनाव प्रणालियां' शीर्षक का विशिष्ट वर्गीक 324.63 होगा।
इसी प्रकार, शीर्षक Anatomy of human lungs (मानवीय फेफड़ों की संरचना)' को वर्गीकृत किया जा सकता है। यह पुस्तक मानव शरीर के अंग से संबंधित है। अत: कोई सामान्य वर्गकार भी बिना समय व्यतीत किए यह बता सकता है कि इसका विषय, मुख्य वर्ग अनुप्रयुक्त विज्ञान के अन्तर्गत चिकित्सा शास्त्र प्रभाग (वर्गीक 610) में वर्गीकृत होगा। अब प्रभाग 610 के अन्तर्गत तृतीय सारांश में देखने पर
611 Human anotomy अनुभाग मिल जाता है। इसके पश्चात्, वर्गीक 611 की अनुसूची के आरंभ में दी गई अनुभागों की सारणी (वितीय खण्ड, पृ. 829) में वर्गीक 611.2 Respiratory system सर्वथा उपयुक्त होता है, जिसके उपविभाजनों पर एक नजर डालने पर विशिष्ट वर्गीक 611.24Lungs मिल जाता है। अत: 'मानवीय फेफड़ों की संरचना' शीर्षक का वर्गीक 611.24 होगा।

International politics (अन्तर्राष्ट्रीय राजनीति) 

यहां यह स्पष्ट करना अत्यन्त आवश्यक है कि एक जटिल विषय वर्गीकरण इतना आसान नहीं होता। उसके लिए संश्लेषण के विभिन्न प्रावधानों का उपयोग करने की आवश्यकता पड़ती है। इन प्रावधानों को उपयोग करने की आवश्यकता पड़ती है। इन प्रावधानों को वर्गीक के अंतर्गत दिए गए विभिन्न निर्देशों, (जिनका वर्णन इसी अध्याय में पहले किया जा चुका है), तथा सारणी -1 के मानक उपविभाजनों के प्रयोग सम्बन्धी सामान्य निर्देशों के द्वारा दर्शाया गया है। 5. सारांश
| इस इकाई को पढ़ने के बाद आप यह जान चुके होंगे कि डी. डी. सी. एक महत्वपूर्ण वर्गीकरण पद्धति है, जिसके अब तक 21 संस्करण प्रकाशित हो चुके हैं। अध्ययन के लिए इस पद्धति का 19 वां संस्करण प्रयोग में लाया जा रहा है। इस संस्करण में पद्धति को 3 भागों में विभाजित किया गया है तथा प्रत्येक के उद्देश्य भिन्न-भिन्न हैं। प्रत्येक के उपयोग के बारे में प्रारम्भिक जानकारी इस अध्याय में दी गई है जो कि आगे आने वाले अध्यायों को समझने के लिए मुख्य भूमिका निभाएगी। 6. अभ्यासार्थ प्रश्न

निम्नलिखित शीर्षकों को वर्गीकृत कीजिए: 

1. 2. 3. 4. Problem of poverty (गरीबी की समस्या) 5. Solar eclipse (सूर्य ग्रहण)
6. Marketing management (विपणन प्रबन्धन)
वर्गीक :-- 1. 158.7
2. 3825 3. 025.431 4. 523.78
5. 327.11 6. 658.8 7. विस्तृत अध्ययनार्थ ग्रंथसूची: 1. DEWEY (Melvi), Dewey Decimal Classification and Relative Index, Ed 19,
1979, V1. 2. SATIJA (MP), Exercise in the 19th edition of Dewey Decimal
Classification, 2001, Concept, New Delhi.
इकाई 10 : सापेक्ष अनुक्रमणिका का प्रयोग उद्देश्य
1. सापेक्ष अनुक्रमणिका की आवश्यकता तथा महत्व से परिचित कराना, 2. अनुक्रमणिका की संरचना से परिचित कराना, 3. इसके विभिन्न प्रावधानों की उपयोगिता से अवगत कराना, 4. विभिन्न प्रकार के निर्देशों से अवगत कराना,

5. वर्गीक निर्धारण की विधि से परिचित कराना। संरचना/विषय वस्तु

1. विषय प्रवेश 2. आवश्यकता एवं महत्व 3. सापेक्ष अनुक्रमणिका का विस्तार 4. अनुक्रमणिका पृष्ठ का स्वरूप 5. अनुक्रमणिका की संरचना 6. प्रविष्टियों में प्रयुक्त संक्षिप्त रूप
6.1 सारणियों के संक्षिप्त रूप 7. प्रतिनिर्देश
7.1 "देखिए" निर्देश
7.2 "और भी देखिए" निर्देश 8. अनुक्रमणिका में अंकों का निर्धारण 9. अनुक्रमणिका के साथ अनुसूची का प्रयोग 10. सारांश । 11. अभ्यासार्थ प्रश्न
12. विस्तृत अध्ययनार्थ ग्रंथसूची 1. विषय प्रवेश
अब आप जान चुके कि डी डी सी के 19वें संस्करण का तृतीय खण्ड अनुक्रमणिका है। 1217 पृष्ठों वाले इस खण्ड में मूल पाठ से पूर्व संक्षिप्त निर्देश (पृ. ४) तथा शब्दों के संक्षिप्त रूपों की कुंजी (पृ. xi-xii) दी गई है। अनुक्रमणिका प्रथम संस्करण से ही डी डी सी का एक अविभाज्य अंग रही है तथा अपने विशिष्ट स्वरूप के कारण अनुसूचियों के प्रयोग में सदैव अत्यन्त महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इस अध्याय में इसकी आवश्यकता, महत्व, उपयोग आदि पर विस्तार से चर्चा करेंगे। | दशमलव की अनुक्रमणिका को सापेक्ष अनुक्रमणिका कहा जाता है क्योंकि यह विषयों की संस्थिति को उलटकर दर्शाती है। जैसा कि सर्वविदित है दशमलव की अनुसूचियां ज्ञान की शाखाओं के अनुसार व्यवस्थित हैं। एक ही विषय के विभिन्न पक्ष अलग-अलग मुख्य वर्गों, प्रभागों या अनुभागों के अंतर्गत विखर जाते हैं। उदाहरणार्थ तांबे का वैज्ञानिक अध्ययन मुख्य वर्ग 5 Pure sciences; तांबे की प्रौद्योगिकी मुख्य वर्ग 6 Technology; तथा तांबा उद्योग के आर्थिक पक्ष मुख्य वर्ग 3 Social sciences के अंतर्गत वर्गीकृत किए जाएंगे। इसके विपरीत, सापेक्ष अनुक्रमणिका में तांबा विषय से संबंधित प्रत्येक पक्ष मुख्य शीर्षक तांबा के अंतर्गत एक स्थान पर दिए हुए मिल जाएंगे।
इस प्रकार सापेक्ष अनुक्रमणिका एक ही विषय के, अनुसूचियों में विभिन्न स्थानों पर बिखरे हुए, अनेक पक्षों को एक स्थान पर उनके आपसी संबंधों सहित दर्शाती हैं।

2. आवश्यकता एवं महत्व

दशमलव में समस्त अनुसूचियां मुख्य वर्गों के उत्तरोतर उपविभाजनों तथा उनके वर्गीकों का व्यवस्थित संग्रह हैं। कोई भी व्यक्ति जिसे ज्ञान के स्वरूप की सामान्य जानकारी हो उपयुक्त अनुसूची में आवश्यक स्थान तक आसानी से पहुंच सकता है। किन्तु एक सामान्य वर्गकार के लिए सम्पूर्ण ज्ञान से प्रारंभिक रूप में परिचित हो पाना भी नितान्त असंभव है। इसके अतिरिक्त दशमलव पद्धति में विभिन्न विषयों को जिस प्रकार मुख्य वर्गों तथा उनके उपविभाजनों में संगठित किया गया है वह तार्किक दृष्टि से अनेक स्थानों पर उचित नहीं है। एसी स्थिति में सीधे अनुसूचियों से वर्गीक तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है। पद्धति के परिगणनात्मक स्वरूप के कारण अनेक स्थानों पर प्रविष्टियों की संख्या अत्यधिक हो जाने से वांछित वर्गीक तक पहुंचना एक समयसाध्य कार्य है।

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