ह्वेनसांग के विवरणों में राजनीतिक झांकी पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखो।
Write a short note on political gleanings from the Accounts of Hiuen-t-sang.
अथवा युवानच्चांग द्वारा वर्णित भारत का संक्षिप्त विवरण दीजिए।Deseribe briefly the conditions of India as narrated by hyuan chwang.
अथवा ह्वेनसांग कौन था? उसने हर्ष और उसके समय के विषय में क्या वर्णन छोड़ा है?
Who was Hiuen t sang? What discription has. he lift about harsha and his time.
ह्वेनसांग ने भारतीय शिक्षा पद्धति, प्रचलित लिपि, भाषा आदि के बारे में विस्तृत विवरण देते हुये लिखा है कि भारत में शिक्षा धार्मिक थी और उसे विहारों में दिया जाता था। अधिकतर पुस्तकें लिखी हुई थीं परन्तु वेदों को जुबानी याद किया जाता था और उन्हें पत्तों या कागज पर नहीं लिखा जाता था। भारत में प्रचलित लिपि को ब्राह्मी लिपि कहा जाता था क्योंकि उसकी उत्पत्ति ब्रह्मा से हुई मानी जाती थी । संस्कृत पढ़े लिखों की भाषा थी। उसका व्याकरण कठोर नियमों में बँधा हुआ था । विद्यार्थी 9 वर्ष की आयु से लेकर 30 वर्ष की आयु तक विद्या अध्ययन करते थे। अध्यापकों को विद्यार्थी गुरु दक्षिणा देते थे ............. भारत में वादविवादों की बहुत अधिक प्रथा प्रचलित थी।
धार्मिक दशा
प्रयाग के धार्मिक मेले के बारे में प्रयाग मेले के सम्बन्ध में चीनी यात्री ह्वेनसांग ने विस्तृत विवरण दिया है। उसके अनुसार यह मेला संगम के पश्चिमी ओर एक बहुत बड़ मैदान में हर पाँचवें वर्ष आयोजित किया जाता है ।सन् 643 ई. में हुई प्रयाग सभा में ह्वेनसांग ने स्वयं भी भाग लिया था। उसके अनुसार इस मेले में सम्राट हर्ष ने अपनी सारी सम्पत्ति लाकर रख दी तथा दान देने का काम शुरू किया। यह कार्य तीन महिने तक होता रहा। इस मेले के सम्बन्ध में कुछ वाक्य उद्धृत करने उचित जान पड़ते हैं वह लिखता है-1. “पहले दिन उन्होंने बुद्ध की मूर्ति स्थापित की और प्रथम श्रेणी के रत्न और वस्त्र | वितरण किये।”
2. “दूसरे दिन आदि देव (सूर्य) की उपासना हुई और पहले दिन की अपेक्षा आथीं मात्रा में रत्न और वस्त्रों का वितरण हुआ।”
3. “तीसरे दिन उन्होंने ईश्वर देव की मूर्ति की स्थापना की और दूसरे दिन के समान ही वस्तुओं का वितरण हुआ।”
4. “अगले दस दिनों में उन लोगों को वस्तुओं का वितरण किया गया जो दूर-दूर से भिक्षा लेने आते थे।” ।
इस समय तक पाँच वर्ष में एकत्र सम्पत्ति समाप्त हो गई । राज्य की रक्षा के लिए आवश्यक हाथी, घोड़ों और सैनिक सामग्रियों के अतिरिक्त कुछ नहीं बचा। तब राजा ने अपने रत्न, वस्त्र, हार, कर्णिका, मुकुट-मणि इत्यादि सभी कुछ दे डाला । सब कुछ दे चुकने के पश्चात् उसने अपनी बहिन से पुराना मामूली वस्त्र माँगा और उसे पहनकर दसों दिशाओं के बौद्धों की पूजा की और प्रसन्नतापूर्वक हाथ जोड़कर उनके सामने झुक गया।” | चीनी यात्री के विवरणानुसार यह हर्ष द्वारा प्रयाग में आयोजित छठा समारोह था।
राजनैतिक दशा-
ह्वेनसांग के विवरणानुसार हर्ष उस समय भारत का सर्वाधिक शक्तिशाली तथा निरंकुश लेकिन प्रजा हितैषी शासक था। वह लिखता है सम्राट हर्ष बहुत परिश्रमी था। वह दिन-रात परिश्रम करने में लगा रहता था। हर्ष दिन को तीन भागों में बाँटता था । दिन का एक भाग शासन के कार्यों की देखभाल में व्यतीत होता था और दिन का दो-तिहाई भाग धार्मिक कार्यों में प्रयोग किया जाता था । हर्ष अपने साम्राज्य का दौरा करता रहता था क्योंकि वह जानता था कि बिना दौरे के वह लोगों के दु:खों का आसानी से पता नहीं लगा सकता और न ही उन्हें दूर कर सकता है। ह्वेनसांग के अनुसार उस समय राज्य की आय की मुख्य स्रोत भू-राजस्व ही था। जो कृषि उपज का छठा भाग होता था। उसके अनुसार संभवतः नदी घाटी एवं नदी बाँधों पर कर लगता था । इसके अतिरिक्त व्यापार से भी आय होती थी । न्याय पक्षपात रहित था। लोगों को अपने नाम पंजीकृत कराने पड़ते थे । कहीं-कहीं सड़कें सुरक्षित नहीं थी। दंड विधान कठोर था लेकिन मृत्युदंड भी दिया जाता था । साधारण अपराध करने वालों पर जुर्माना किया जाता था।हर्ष की सेना विशाल और सुसज्जित थी । हर्ष राज्य की आय को व्यय के उद्देश्यों से चार भागों में विभाजित करता था। राज्य आय का प्रथम भाग सरकारी कार्यों के लिए, दूसरा भाग सरकारी कर्मचारियों के लिए, तीसरा विद्वानों की सहायतार्थ, चौथा भाग भिक्षुओं और ब्राह्मणों के दान देने के लिए रखता था। थानेश्वर हर्ष की राजधानी थी, परन्तु बाद में कन्नौज उसकी राजधानी बन गई । हर्ष के पास 60,000 हाथी, 1,00,000 घुड़सवार एवं 50,000 पैदल सैनिक थे ।
संक्षिप्त रूप से कहा जा सकता है कि ह्वेनसांग का विवरण हमें हर्षकालीन भारतीय । जीवन के विभिन्न पहलुओं के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान करता है। उसने स्वयं भारत में अनेक वर्षां रहकर जो देखा, सुना तथा समझा इसी के आधार पर विस्तृत जानकारी दी है। उसने धार्मिक अवस्था के साथ-साथ तत्कालीन राजनीतिक, सामाजिक तथा शिक्षा के बारे में भी वर्णन दिया है। उसके विवरण में तत्कालीन भारतीयों के रीति-रिवाजों के बारे में है पर्याप्त प्रकाश पड़ता है।
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